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कैसे आई कच्चे तेल की दरों में भारी गिरावट

अमेरिका में कच्चे तेल की कीमतें शून्य से नीचे दर्ज की गईं और इससे सभी यूरोपीय बाजारों में गिरावट देखी गई। अमेरिका में क्रूड माइनस 40 डॉलर प्रति बैरल हो गया। कोरोनोवायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान से निवेशकों को झटका दिया। बीपी, रॉयल डच शेल और टोटल  3% और 4.0% के बीच गिर गया, वहीं यूरोपीय स्टॉक मार्केट सूचकांक में  600 अंक की गिरावट दर्ज़ की गई है। बाज़ार में भंडारण क्षमता में कमी होने की वज़ह से की व्यापारी भी अनुबंध से पीछे हट रहे हैं। दरअसल दुनियाभर में लॉकडाउन को देखते हुए जिन कारोबारियों ने मई के लिए सौदे के वायदे किए थे वे अब इसको लेने को तैयार नहीं। उनके पास पहले से इतना तेल जमा भंड़ार है जिसकी खपत नहीं हो पा रही है। इसलिए उत्पादक उन्हें अपने पास से रकम देने को तैयार है। गौरतलब है कि कच्चे तेल की कीमतों में ये एतिहास गिरावट पहली बार देखने को मिली है।

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