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Ertugrul के तुर्की ने कोरोना से आख़िर कैसे जीती जंग

कोरोना के इस काल में तुर्की दो चीजों के लिए दुनिया भर में सुर्खियां बटौर गया। पहली चीज़ Ertugrul Ghazi पर बनी एक वेब सारीज़। 2014 में बने इस ड्रामे को दुनिया भर में देखा गया। और दूसरी चीज़ जिसके लिए तुर्की दुनिया के लिए मिसाल बना, वो है कोरोना जैसी बिमारी पर जीत हासिल करना।

कोरोना को काबू करने के लिए सभी देशों ने लॉकडाउन किया। तुर्की का तरीका बाकि देशों से अलग रहा। तुर्की ने बिना संपूर्ण लॉकडाउन के कोरोना संक्रमण को कंट्रोल किया है। यहाँ पहला कोरोना का मामला लेट मार्च में आया और महीने भर में देश के सभी प्रांतों में फ़ैल गया। तुर्की में बाकि दुनिया के मुकाबले कोरोना संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा था, हालात यूरोपीय देशों से भी ख़राब हो गए थे। तुर्की में आधिकारिक तौर पर 4397 लोगों की मौत हुई है, जो की वहां की जनसंख्या के हिसाब से काफ़ी कम है।

कैसा लॉकडाउन किया तुर्की ने ?

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए तुर्की ने बहुत जल्दी प्रतिक्रिया की। टेस्ट करने, पहचान करने, अलग करने और आवागमन को रोकने पर जोर दिया। तुर्की उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो वायरस के प्रभावों को रोकने में कामयाब रहा है। अधिकारियों ने लॉकडाउन के नाम पर रोजमर्रा की जिंदगी पर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए थे। जैसे कि कॉफी हाउस और शॉपिंग मॉल्स बंद किये और मस्जिदों में सामूहिक नमाज़ पर रोक की गई। 65 साल से ऊपर और 20 साल से कम उम्र के लोगों को पूरी तरह से घर में रहने को कहा गया। मुख्य शहरों को सील कर दिया गया।

तुर्की का वायरस ट्रैकिंग मेथड क्या है?

अब पाबंदियों में ढील दी जा रही है लेकिन डॉ असलान अभी भी चौकन्नी रहती हैं। डॉ असलान इस्तांबुल के फ़तीह जो की भीड़भाड़ वाला इलाका है, वहां की स्वास्थ्य निदेशक हैं। डॉ असलान कांटेक्ट ट्रेसिंग अभियान को चला रहीं हैं। इसके लिए इनकी टीम ने योजना बनाई और फ़तीह के तंग गलियों में जाकर पेशेंट्स की ट्रेसिंग और चेकिंग शुरू की। पीपीई किट पहन कर डॉक्टर्स की टीम कोरोना संक्रमित इलाकों में जाती और ऐप की मदद से इन जगहों को सील किया जाता।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का भी इस्तेमाल

तुर्की में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख अधिकारी डॉ इरशाद शेख बताते हैं कि इस देश के पास दुनिया को लेकर बहुत  सबक हैं। आज तुर्की में हालात काबू में है तो इसका श्रेय कांटेक्ट ट्रेसिंग, फ़ास्ट क्वारंटीन और तुर्की की बाकि नीतियों को जाता है। इलाज के लिए मरीज़ों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भी दी गई। इसपर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जमकर तारीफ़ की थी लेकिन फ़िलहाल अंतरराष्ट्रीय शोध ने इस दवा को खारिज कर दिया है। कुछ मेडिकल जर्नल्स के हिसाब से इस दवा से कोविद 19 के मरीज़ों में कार्डिएक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।

तुर्की के चीफ़ डॉक्टर नुरेत्तिन यीयीत कहते हैं कि शुरुआत में HCQ का इस्तेमाल करना अहम है। उनका मानना है कि दूसरे देशों ने इस दवा का इस्तेमाल काफी देर से शुरू किया। डॉ यीयीत कहते हैं कि तुर्की ने वायरस से आगे रहने की कोशिश की है। तुर्की में डॉक्टर्स हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के अलावा बाकि दवाओं और प्लाज़्मा के साथ बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का इस्तेमाल बताते हैं।


लड़ाई अभी लंबी है

तुर्की मेडिकल एसोसिएशन ने अभी सरकार को क्लीन चिट नहीं दी है। रोज़ाना अभी भी लगभग हजार केस आ रहें हैं। इस लड़ाई में तुर्की के पक्ष में काफी चीजें रही हैं, जैसे युवा, आबादी और आईसीयू की अधिक संख्या।तुर्की की इस परफॉरमेंस को अच्छा बताया जा रहा है, लेकिन अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है और लड़ाई खत्म नही हुई है।

रिपोर्ट- अदिति शर्मा

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