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जाने इस ऐतिहासिक GDP के गिरने का आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर

भारत, पहली तिमाही में ऐतिहासिक जीडीपी GDP की गिरावट से पता चलता है कि अभी देश की अर्थव्यवस्था को रिकवर होने में समय लग सकता है। वैसे तो पूरे विश्व की आर्थिक स्थिति पर कोरोना के चलते असर पड़ा है लेकिन भारत की माइनस 23.9 जीडीपी का सीधा असर देश के उद्योग और बाकि चीजों में नज़र आ रहा है।

कौनसा सेक्टर हुआ कितना प्रभावित?

सबसे अधिक प्रभावित है निर्माण (-50%) का क्षेत्र। इसके बाद व्यापार, होटल और अन्य सेवाएं -47% पर पहुंच गए हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (-39%), और खनन (-23%) के क्षेत्र में भी भारी गिरावट देखी गयी है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह सारे क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं और अधिकतम नई नौकरियों का सृजन करते हैं। अब ऐसी स्थिति में इन क्षेत्रों में इतनी भारी गिरावट का असर आम आदमी के जीवन और साफ़ नज़र आएगा।

$5 ट्रिलियन की इकॉनमी कैसे बनेगा भारत?

2019 में जितने के बाद दूसरे टर्म में मोदी सरकार ने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था को $5 ट्रिलियन तक लेकर जाना है। लेकिन इस ऐतिहासिक गिरावट के बाद जो आज से पहले भारत में कभी नहीं देखी गयी यह सपना अब काफी दूर नज़र आ रहा है।

जॉब्स का हाल

आपको बता दें, सरकार के गलत फैसलों के चलते आज अर्थव्यवस्था का यह हाल हो गया है। सरकार ने हर साल 2 करोड़ जॉब देने का वादा किया था लेकिन आलम ऐसा है कि 2 साल से SSC और रेलवे जैसी भर्तियां रुकी हुई हैं। और अब कोरोना और लॉकडाउन के चलते देश में कई लोग बेरोजगार हो गए हैं। जॉब्स बनाने वाले सभी क्षेत्रों की उत्पादन और आय में भारी गिरावट आई है जिसका साफ़ मतलब है कि यह स्थिति और बेरोजगारी पैदा कर सकती है

मार्केट में दिखाई दे रहा है असर

अर्थव्यवस्था सलाहकार के वी सुब्रमनियम ने कहा कि भारत की जीडीपी इस तरह गिरने की एक मुख्य वजह है लॉकडाउन। अब सरकार ही भारत को इस संकट से बहार निकाल सकती है। सरकार को अब मार्किट में पैसा देना होगा। नोटेबन्दी के बाद से ही मार्किट में पैसे के फ्लो में कमी आ गयी थी। लोगों की डिमांड घट गई थी और तभी से जीडीपी नीचे गिरती चली गयी। फ़िलहाल बाज़ार की स्थिति ऐसी ही है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ठप है और सभी मुख्य सेक्टर की हालात खराब है। लोग पैसा मार्किट में निवेश नहीं कर रहे हैं और इसलिये इन्वेस्टमेंट में भी कमी देखी गयी है। इसके अलावा भारत के बैंक्स की भी स्थिति बहुत बेकार है।

क्या होना चाहिए सरकार का अगला कदम?

यह कहना सही है कि मोदी सरकार ने इस पतन को रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। अब सरकार को निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में निवेश करने और अधिक खर्च करना होगा।  निजी बिजनेस को पुनर्जीवित करने के लिए करों में कटौती करनी होगी। इसके अलावा यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पादकों के पास उत्पादन बढ़ाने के लिए मूल्यप्रोत्साहन है या नही। बता दें पहले तीन महीनों में निजी खपत और निवेश में 14 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।  यह गिरावट आने वाले समय में और देखी जा सकती है। इसलिये इस संकट से निकलने के लिए सरकार को बड़े और सही फैसले लेने की जरूरत है।

अदिति शर्मा

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