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आखिर क्यों बदलना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को अपना फैसला

उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए खुद ही पुराने आदेश को बदल दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी सरकारी और प्राइवेट लैब में कोरोना का टेस्ट फ्री में होगा लेकिन नए आदेश में फ्री टेस्ट केवल गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों का ही होगा।

उच्चतम न्यायालय ने कोरोना के टेस्ट को फ्री करवाने के अपने पुराने आदेश में बदलाव करते हुए अब इसे केवल गरीब तबकों तक सीमित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट नए आदेश के मुताबिक गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले, EWS और आयुष्मान भारत के मरीजों की टेस्टिंग फ्री होगी। इससे पहले आदेश में देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया था कि सरकारी या प्राइवेट दोनों की लैबों पर कोरोना वायरस की जांच फ्री की जाएगी। इस आदेश के बाद एक डॉक्टर ने अपील की थी कि इस आदेश में दोबारा विचार करना चाहिए और केवल गरीबों की ही जांच फ्री में होना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस की जांच सिर्फ वहीं लैब करें तो NABL यानी National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories से मान्यता प्राप्त हो या विश्व स्वास्थ्य संगठन या इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से मंजूरी प्राप्त किसी एजेंसी के जरिए होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में निजी संस्थाओं द्वारा कोरोना परीक्षण के लिए अधिकतम 4,500 रुपये तय करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की सलाह को चुनौती दी गई थी। याचिका में यह भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि ऐसे सभी परीक्षण मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल लैबों द्वारा किए जाएं। मुफ्त में टेस्ट का सुझाव देते हुए, याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि प्राइवेट लैबों के टेस्टिंग फीस पर पर्दा डालना संविधान के आदर्शों और मूल्यों का उल्लंघन करता है।

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