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काबुल में तालिबान का कब्ज़ा, राष्ट्रपति ने छोड़ा देश

लगभग 20 साल के बाद एक बार फिर अफगानिस्तान में तालिबानियों की हुकूमत कायम होने जा रही है। काबुल समेत देश के सभी शहरों पर तालिबान का कब्जा हो चुका।

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान लड़ाकुओं ने घुसपैठ कर कब्ज़ा कर लिया है। अफ़ग़ानिस्तान के कई बड़े इलाकों पर तालिबान लड़ाकों ने कब्ज़ा कर लिया है। जानकारी के अनुसार, काबुल के स्थानीय लोगों ने भी तालिबान आतंकियों द्वारा वहाँ घुसपैठ की पुष्टि की है। वहां से अभी किसी भी तरह की हिंसा की ख़बर नहीं आयी है लेकिन तालिबानियों को रोकने के प्रयास भी नहीं किये जा रहे हैं। तालिबान ने अपने लड़ाकों को आदेश दिया है कि वो हिंसा न करें और वहाँ से आम लोगों को जाने की इजाज़त दी है।

सेना और आम नागरिकों पर हमला नहीं करेगा तालिबान

काबुल में प्रवेश को लेकर तालिबान ने एक बयान भी जारी किया है। बयान के मुताबिक तालिबान काबुल पर ताक़त के दम पर कब्ज़ा नहीं करना चाहता। वो सब कुछ सत्ता परिवर्तन के ज़रिए चाहते हैं। तालिबान ने बयान में यह भी कहा है कि अगर सत्ता परिवर्तन आराम से हो जाता है तो किसी भी प्रकार का जान माल का नुकसान नहीं किया जायेगा। तालिबान के मुताबिक वो आम नागरिकों और सेना के खिलाफ़ कोई हमला नहीं करेंगे। तालिबान ने कहा कि वो सबको माफ़ कर रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने देश छोड़ा

खबरें आ रही हैं कि तालिबानियों द्वारा कब्ज़ा किये जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्ला सालेह ने तालिबान को सत्ता सौंप कर देश छोड़ दिया है। ऐसी आशंका भी जताई जा रहे है कि अशरफ़ गनी अब अमेरिका जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अली अहमद जलाली को नई अंतरिम सरकार का अंतरिम प्रमुख बनाया जा सकता है। तालिबान ने पिछले दस दिनों में अफ़ग़ानिस्तान के अधिकतर बड़े शहरों पर कब्ज़ा जमा लिया था जिसके बाद राष्ट्रपति अशरफ़ गनी पर इस्तीफ़ा देने का निरंतर दबाब बनाया जा रहा था।

अमेरिका जुटा अपने नागरिकों के रेस्क्यू में

तालिबान के काबुल में घुसने की खबर से पूरे विश्व में खलबली मच गई है। इसी बीच अमेरिका काबुल से अपने डिप्लोमैट और नागरिकों को बाहर निकालने में जुट गया है। चिनूक हैलीकॉप्टर के ज़रिए लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है।

20 साल बाद फिर से हुआ है कब्ज़ा

तकीबान ने 20 साल के बाद फिर से अफ़ग़ानिस्तान पर जीत हासिल कर ली है। 20 साल पहले भी तालिबान के यहाँ कब्ज़ा था। 2001 में अमेरिकी हमले के फलस्वरूप तालिबान को वहाँ से भागना पड़ा था।
-भावना शर्मा
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