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लॉकडाउन में ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के क्या है मायने

किताबें किसी भी समाज के विचार और विकास के लिखित दस्तावेज हैं। जिनका मूल्यांकन दशकों तक समाज में बदलाव और विकास की भूमिका में किया जाता है। ऐसे में लोगों में किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को 23 अप्रैल को हर साल विश्व पुस्तक दिवस के रुप में मनाता है। कोरोना के कारण जब पूरी दुनिया परेशान है, तो लॉक डाउन के समय किताब आपके लिए एक बेहतर माध्यम है। भले ही आज के इंटरनेट फ्रेंडली वर्ल्ड में सीखने के लिए सब कुछ इंटरनेट पर मौजूद है लेकिन इन सब के बावजूद जीवन में पुस्तकों का महत्त्व आज भी बरकरार है क्योंकि किताबें बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हमारे सच्चे दोस्त का हर फर्ज़ अदा करती आयी है। किताबे हमें ज्ञान देती हैं और उस ज्ञान को जीवन की परिस्थितियों में सही तरह से लागू करने का गुर भी सिखाती है।  इतना ही नहीं, वर्तमान समय में खुद को हर हाल में आगे बढ़ाने का हुनर भी किताबें हमें सिखाती हैं। वर्ल्ड बुक डे वाले दिन को कॉपीराइट डे भी कहा जाता है। इसको मनाने का उद्देश्य किताबों का आनंद लेने और पढ़ने की कला को बढ़ाना है। इस दिन लोगों को किताबों को पढ़ने का महत्व बताया जाता है। एक तरह से देखा जाए तो किताबें हमारी सच्ची जीवन साथी होती हैं। किताबें हमारे जीवन को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्व पुस्तक दिवस का उद्देश्य लोगों में और खासकर बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा होना चाहिए। कोरोना महामारी के चलते जब सारी दुनिया में लॉ़कडाउन है तबह ऐसे में किताबें हमारी जिंदगी की अच्छी दोस्त हो सकती है। टाइम पास के साथ साथ ये हमारे अंगर ज्ञान का संचार भी करती है। ऐसे वक्त में जब बाहर मौत का पहरा हो तब हमें घरों में सुरक्षित रहकर किताबों के साथ अपना दोस्त बनाना सिखना होगा।

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